जब कभी आती है राहों में मुश्किलें
उठती है नज़र तुम्हारी तरफ
जब मालूम हो ये की तुम न कर पाओगे कुछ
फिर भी उठती है नज़र,
कि तुम्हारी एक मुस्कान से आती है
उम्मीद कि ऐसी रौशनी ,
ये मालूम है हमें कि तुम्हारी दुवाओं
में हम हैं शामिल
शिकवा नहीं हमें इस बात का
कि तुम साथ हमारे नहीं हर राह पर
इतना ही है बहुत हमारे लिए
कि किसी मोड़ पे तुम से मिलेंगे ज़रूर
और तुम्हारी मुस्कुराने से मिट जाएगी ये थकान
कि मंजिल भले न हो तुम
मंजिल तो तुमसे ही है
सफ़र तो तुमसे ही है ..
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